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ए रुक जा, अगर दोबारा यहाँ आया ना, तो फिर तुझमे और उन हड्डियों में कोई फर्क नहीं रहेगा | Kabadadaari
या तो यह लालच हो सकती है या कोई साजिश, लेकिन जो बलि चढ़ी वो थी मासूम सी बच्ची | Kabadadaari
ये आग इंसानों को नहीं जलाती है, ये वही आग है जिसमें जिन पैदा होते हैं और इसी में खत्म | Qatil Saya
ये जो ट्रैफिक डिपार्टमेंट है ना, मंदिर के दान पेटी जैसा है, आती हुई लक्ष्मी को रोको मत | Kabadadaari